देहरादून/पानीपत हर्षिता।: हरियाणा के पानीपत के हैंडलूम को विदेशों तक पहुंचाने वाले 84 वर्षीय बुनकर खेमराज सुंदरियाल को पद्मश्री अवॉर्ड दिया गया है. खेमराज सुंदरियाल मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के सुमाड़ी गांव के रहने वाले हैं.
बनारस में टेपेस्ट्री कला सीखी : उत्तराखंड के पौढ़ी गढ़वाल के गांव से आने वाले खेमराज सुंदरियाल का शुरुआती जीवन काफी ज्यादा संघर्षों से भरा रहा. लेकिन वे बचपन से ही कुछ बड़ा करने का सपना देख चुके थे जिसके चलते उन्होंने हार नहीं मानी. साल 1964 में वे श्रीनगर गढ़वाल से बुनाई का डिप्लोमा हासिल करने के बाद दिल्ली गए. वहां पर उन्होंने एक क्लॉथ मिल में नौकरी की. इसके बाद वे एक बुनकर सेवा केंद्र से जुड़ गए. इसके बाद वे बनारस पहुंचे जहां पर उन्होंने टेपेस्ट्री कला सीखी. टेपेस्ट्री एक प्राचीन कला है, जिसमें धागों की बुनाई के जरिए कपड़ों पर विस्तृत चित्र या पैटर्न बनाए जाते हैं. इस कला में महारत हासिल करने के बाद उन्होंने इसे देश में एक नई पहचान दिलाई.

पानीपत में बस गए खेमराज सुंदरियाल : 1975 में खेमराज सुंदरियाल हरियाणा के पानीपत के बुनकर सेवा केंद्र पहुंचे और ये शहर उन्हें इतना भाया कि वे फिर पानीपत के ही होकर रह गए. पानीपत में उन्होंने काफी दिनों तक खड्डी चलाई. ग्रामीण इलाकों में ‘खड्डी’ उस मशीन या लकड़ी के ढांचे को कहते हैं जिस पर सूती या रेशमी धागों से कपड़ा बुना जाता है. इसके बाद वे टेक्सटाइल इंडस्ट्री से जुड़े और फिर कुछ ऐसे डिजाइन तैयार किए जो देश ही नहीं बल्कि विदेशों में काफी ज्यादा मशहूर हुए. उन्होंने इस दौरान स्थानीय बुनकरों को प्रशिक्षण देना शुरू किया और उनकी कला को एक नया आसमान मुहैया कराया. खेमराज सुंदरियाल ने हजारों लोगों को हैंडलूम की ट्रेनिंग दी और भारतीय हस्तशिल्प को विश्व पटल पर पहचान दिलाई. साथ ही हजारों लोगों को रोजगार का साधन मुहैया कराया.
अलग छाप छोड़ी : उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और समर्पण से अपनी एक अलग ही छवि बनाई. खेमराज सुंदरियाल को हैंडलूम और टेपेस्ट्री कला के लिए कई राष्ट्रीय और हरियाणा राज्य सरकार की ओर से भी सम्मानित किया जा चुका है. खेमराज सुंदरियाल ने हैंडलूम और बुनाई के क्षेत्र में अपनी एक अलग छाप छोड़ी है जिसके चलते उन्हें आज पद्मश्री अवॉर्ड दिया गया है. उनका जीवन और संघर्ष ये बताता है कि मेहनत, लगन और समर्पण से इंसान चाहे तो कोई भी ऊंचाई हासिल कर सकता है. आज खेमराज युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुके हैं.
