देहरादून। हर्षिता।उत्तराखंड में मानसून की विदाई के बीच आंखों से जुड़ी समस्याएं बढ़ने लगी हैं। बदलते मौसम के साथ वायरल कंजंक्टिवाइटिस (आई फ्लू) और एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस के लक्षण बच्चों से लेकर बड़ों तक में दिखाई दे रहे हैं। मौसमी फ्लू के बीच आंखों में लालिमा, खुजली और पानी आने जैसी शिकायतें भी लोगों को परेशान कर रही हैं।
आंखें लाल, खुजली और चुभन को न करें नजरअंदाज
आई फ्लू के प्रमुख लक्षणों में आंखों का लाल होना, खुजली या चुभन महसूस होना, आंखों से पानी आना और किरकिरी लगना शामिल हैं। हालांकि, वायरल संक्रमण और एलर्जी के लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं। ऐसे में केवल लक्षणों के आधार पर दोनों के बीच अंतर करना मुश्किल है। आंखों में लगातार परेशानी रहने पर नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।
वायरल और एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस में क्या है अंतर?
वायरल कंजंक्टिवाइटिस: यह संक्रमण संक्रमित व्यक्ति की आंखों से निकलने वाले तरल, दूषित हाथों या संक्रमित सतहों के संपर्क से फैल सकता है। इसमें आंखों में लालिमा, पानी आना और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस: यह संक्रामक नहीं होता। धूल, परागकण, फफूंद और अन्य एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों के संपर्क में आने से इसकी शिकायत हो सकती है। इसमें आंखों में खुजली, लालिमा और पानी आने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
सावधान रहें! खुद से आई ड्रॉप डालना पड़ सकता है भारी
बदलते मौसम और वातावरण में मौजूद धूल-मिट्टी के कारण आंखों की परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में आंखों को बार-बार छूने या मलने से बचना चाहिए। हाथों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और धूल-मिट्टी वाले स्थानों पर आंखों को सुरक्षित रखने का प्रयास करें।
डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या स्टेरॉयड आई ड्रॉप का इस्तेमाल न करें। गलत दवा आंखों की समस्या को बढ़ा सकती है या सही इलाज में देरी कर सकती है।
बच्चों के लिए खास सावधानी, इन बातों का रखें ध्यान
बच्चों में आंखों से जुड़ी परेशानी होने पर माता-पिता को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए निम्नलिखित सावधानियां अपनाएं:
बच्चों को नियमित रूप से साबुन से हाथ धोने की आदत डालें।
आंखों को मलने और बार-बार छूने से रोकें।
तौलिया, रूमाल और आंखों से संपर्क में आने वाली निजी वस्तुएं साझा न करें।
आंखों में लालिमा, पानी या अन्य लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लें और संक्रमण की आशंका होने पर बच्चे को स्कूल भेजने से बचें।
आंखों में परेशानी होने पर कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल न करें और विशेषज्ञ की सलाह लें।
बिना चिकित्सकीय परामर्श के कोई आई ड्रॉप इस्तेमाल न करें।
बदलते मौसम में सतर्कता ही बचाव: आंखों में लालिमा, तेज दर्द, रोशनी से परेशानी या नजर धुंधली होने जैसे लक्षण दिखाई दें तो जल्द चिकित्सकीय जांच कराएं। समय पर सही जांच और सावधानी से आंखों
