देहरादून, हर्षिता। उत्तराखंड में नवंबर का पहला सप्ताह हादसों के लिहाज से बेहद दर्दनाक साबित हुआ है। महज सात दिनों के भीतर प्रदेश में हुए तीन बड़े हादसों ने 14 परिवारों की खुशियां छीन लीं। कहीं आसमान में उड़ता हेलीकॉप्टर पहाड़ से टकराकर क्रैश हो गया, तो कहीं पर्यटकों से भरी कार गहरी खाई से होते हुए भागीरथी नदी में समा गई। वहीं, देहरादून में बेकाबू कंटेनर एक कार पर पलट गया, जिसमें एक ही परिवार के तीन सदस्यों समेत चार लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
हवा, पानी और हाईवे पर मौत का तांडव! इन तीनों हादसों में अब तक 14 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि उत्तरकाशी के गंगनानी हादसे में दो महिलाएं लापता हैं। अलग-अलग परिस्थितियों में हुए इन हादसों ने उत्तराखंड की हवाई सेवाओं, पहाड़ी सड़कों और हाईवे पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है।
1. बदरीनाथ से लौट रहा हेलीकॉप्टर हाथी पर्वत के पास क्रैश, पायलट समेत 6 की मौत
हादसों की पहली बड़ी घटना चमोली जिले में सामने आई, जहां बदरीनाथ धाम से देहरादून लौट रहा ट्रांस भारत एविएशन का हेलीकॉप्टर ज्योतिर्मठ क्षेत्र में हाथी पर्वत के आसपास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हेलीकॉप्टर दोपहर करीब 1:14 बजे बदरीनाथ से सहस्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना हुआ था। उड़ान के कुछ समय बाद ही उसका संपर्क टूट गया और ट्रैकिंग सिस्टम भी उसकी लोकेशन बताने में नाकाम रहा।
बाद में चाई गांव के पास हेलीकॉप्टर के क्रैश होने की सूचना मिली। हादसे में पायलट समेत सभी छह लोगों की मौत हो गई। हेलीकॉप्टर में सवार पांच यात्री कर्नाटक के रहने वाले थे, जबकि पायलट दिल्ली निवासी था। मृतकों में कर्नाटक के पुलिस अधिकारी अरुण सालुंके भी शामिल थे।
सूचना मिलते ही सेना, पुलिस, जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और आईटीबीपी की टीमों ने दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में राहत एवं बचाव अभियान चलाया।
2. गंगनानी में खाई से सीधे भागीरथी नदी में समाई कार, 4 की मौत, दो महिलाएं लापता
दूसरा बड़ा हादसा उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री हाईवे पर गंगनानी के पास हुआ। यहां धारा कुंड से करीब 20 मीटर आगे डबरानी की ओर जा रही एक इनोवा कार अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी और सीधे भागीरथी नदी में समा गई।
कार में सात लोग सवार बताए गए थे। हादसे की सूचना पर पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और मेडिकल टीमों ने रेस्क्यू अभियान शुरू किया। तलाशी के दौरान नदी किनारे से चार लोगों के शव बरामद किए गए, जबकि 17 वर्षीय वेदांत अशोकभाई पटेल को गंभीर हालत में बचाया गया।
हादसे में गुजरात निवासी अशोकबेन, रुतिका पटेल और घनश्यामभाई सरवालिया के अलावा हरिद्वार निवासी चालक सुरेंद्र सिंह की मौत हुई। वहीं, सुधाबेन अशोकभाई पटेल और किरणबेन विशालभाई पटेल लापता बताई गईं। दोनों की तलाश में नदी में सर्च ऑपरेशन चलाया गया।
इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर संवेदनशील मोड़ों पर क्रैश बैरियर, पैरापिट और चेतावनी संकेत कितने प्रभावी हैं?
3. देहरादून में कार पर पलटा मौत बनकर आया कंटेनर, एक ही परिवार के 3 सदस्यों समेत 4 की मौत
तीसरी और बेहद दर्दनाक घटना 4 नवंबर को देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर मोहब्बेवाला के पास हुई। यहां माल से भरा एक भारी कंटेनर अचानक कार के ऊपर पलट गया। कार में सवार विश्वेश कपूर, उनकी पत्नी निशा आनंद कपूर, मां किरण कपूर और चालक नीरज कुमार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में परिवार का छह वर्षीय बच्चा घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
बताया गया कि कपूर परिवार सहारनपुर से देहरादून अपने रिश्तेदारों से मिलने आ रहा था। लेकिन शहर में दाखिल होने से पहले ही यह सफर जिंदगी का आखिरी सफर बन गया। कंटेनर में प्लास्टिक के दाने भरे हुए थे। भारी कंटेनर के नीचे कार पूरी तरह दब गई। पुलिस और राहत टीमों ने क्रेन की मदद से वाहनों को हटाकर यातायात सुचारू कराया।
25 चालान लंबित, फिर भी सड़कों पर दौड़ रहा था कंटेनर!
इस हादसे के बाद एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि कंटेनर के खिलाफ यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े 25 चालान लंबित थे। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहन की निगरानी आखिर कौन कर रहा था?
क्या लंबित चालानों के बावजूद ऐसे वाहनों की सड़कों पर आवाजाही रोकने या निगरानी करने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है? हादसे के बाद एनएचएआई और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। मोहब्बेवाला क्षेत्र में पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे सड़क की डिजाइन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
तीन हादसे, तीन अलग वजहें, लेकिन सवाल एक—आखिर कब सुधरेंगे सुरक्षा इंतजाम?
उत्तराखंड में सात दिनों के भीतर हुए इन तीन बड़े हादसों ने साफ कर दिया है कि खतरा सिर्फ पहाड़ी सड़कों तक सीमित नहीं है। आसमान में हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा, पहाड़ों में खतरनाक मोड़ और मैदानी इलाकों में भारी वाहनों की लापरवाही, हर जगह सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा हो रही है।
चारधाम यात्रा और पर्यटन के दौरान प्रदेश में बाहरी राज्यों से आने वाले यात्रियों और वाहनों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में मौसम की सटीक जानकारी, तकनीकी जांच, अनुभवी पायलट, पहाड़ी सड़कों पर मजबूत सुरक्षा अवरोध और भारी वाहनों की सख्त निगरानी बेहद जरूरी है।
परिवहन मंत्री ने दिए जांच और कार्रवाई के निर्देश
उत्तराखंड के परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने देहरादून हादसे के बाद अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। उत्तरकाशी हादसे की जांच के भी आदेश दिए गए हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यात्रा काल के दौरान सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति वाहन चालकों को जागरूक किया जाता है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन हादसों के बाद जिम्मेदार विभागों की नींद टूटेगी या फिर जांच और कार्रवाई के आश्वासन के बीच उत्तराखंड की सड़कों और आसमान में हादसों का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा?
