दिव्या टाइम्स इंडिया। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और जंग हर दिन और खतरनाक रूप लेती जा रही है। इसी बीच अमेरिका और इजरायल के संभावित हवाई हमलों से बचने के लिए ईरान ने एक बेहद अनोखी और चतुर सैन्य रणनीति अपनाई है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अपने असली सैन्य ठिकानों को सुरक्षित रखने के लिए चीन में बने लगभग 9 लाख ‘इन्फ्लेटेबल डिकॉय’ यानी हवा से फुलाए जाने वाले नकली हथियारों और गुब्बारों का इस्तेमाल कर रहा है।
ये गुब्बारे देखने में बिल्कुल असली टैंक, मिसाइल लॉन्चर और लड़ाकू विमानों जैसे दिखाई देते हैं। दूर से देखने या सैटेलाइट निगरानी के दौरान अमेरिकी सेना के लिए यह पहचान पाना बेहद मुश्किल हो जाता है कि कौन सा हथियार असली है और कौन सा सिर्फ हवा से भरा नकली मॉडल।
इस रणनीति का मकसद साफ है—अमेरिका और इजरायल को भ्रमित करना, ताकि वे अपनी करोड़ों डॉलर कीमत की महंगी मिसाइलें इन नकली लक्ष्यों पर दाग दें और असली सैन्य ठिकाने सुरक्षित रह जाएं।
खास बात यह है कि ये नकली हथियार सिर्फ दिखने में ही असली नहीं लगते, बल्कि इनमें ऐसी तकनीक भी लगाई गई है जो असली हथियारों की तरह गर्मी (हीट सिग्नेचर) पैदा करती है। इससे ‘हीट-सीकिंग’ मिसाइलें भी आसानी से धोखा खा जाती हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि ईरानी सैनिक कुछ ही मिनटों में हवा भरकर एक बड़ा मिसाइल सिस्टम या टैंक जैसा ढांचा तैयार कर देते हैं। बताया जा रहा है कि ये डिकॉय चीन से बड़ी मात्रा में मंगवाए गए हैं, जो चीन और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य नजदीकियों की ओर भी इशारा करते हैं।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के लिए यह रणनीति एक बड़ी चुनौती बन गई है। दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक होने के बावजूद, इतनी बड़ी संख्या में नकली लक्ष्यों के बीच असली सैन्य ठिकानों की पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
रक्षा विशेषज्ञ इसे ‘किफायती जंग’ (Low Cost Warfare) का उदाहरण बता रहे हैं। एक इन्फ्लेटेबल गुब्बारा कुछ सौ डॉलर में तैयार हो जाता है, जबकि उसे नष्ट करने वाली मिसाइल की कीमत लाखों डॉलर तक होती है। भारतीय मुद्रा में यह रकम करोड़ों तक पहुंच जाती है, जो अमेरिका जैसे बड़े देश के खजाने पर भी भारी पड़ सकती है।

By DTI