देहरादून/हरिद्वार: हर्षिता। उत्तर भारत में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड के शहर भी इसकी चपेट में आते जा रहे हैं। कभी अपने सुहावने मौसम और ठंडी रातों के लिए पहचान रखने वाला Dehradun अब दिन ही नहीं बल्कि रात में भी लोगों को पसीना छुड़ा रहा है। वहीं धर्मनगरी Haridwar में भी हालात तेजी से बदल रहे हैं। यहां गर्म हवाएं और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं।
देहरादून में जहां तापमान 40 से 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, वहीं हरिद्वार में भी पारा लगातार रिकॉर्ड स्तर छू रहा है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि रात के समय तापमान में पहले जैसी गिरावट नहीं हो रही। देर रात तक गर्मी और उमस लोगों को बेचैन बनाए रखती है। कभी राहत देने वाली पहाड़ी हवाएं अब गर्म एहसास कराने लगी हैं।
बदलता मौसम, बदलती रातें
मौसम विभाग के पुराने आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 1991 से 2020 के बीच मई महीने में देहरादून का न्यूनतम तापमान सामान्यतः 21 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 35 डिग्री के आसपास रहता था। लेकिन अब न्यूनतम तापमान 25 डिग्री तक पहुंच रहा है, जबकि अधिकतम तापमान 40 डिग्री पार कर चुका है। हरिद्वार में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां दिन और रात दोनों का तापमान लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल ग्लोबल वार्मिंग का असर नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और स्थानीय कारणों का नतीजा भी है।
कंक्रीट का जंगल बढ़ा रहा गर्मी
अर्थ साइंस के पूर्व डीन प्रोफेसर H P Bhatt के अनुसार पहले दिन और रात के तापमान में बड़ा अंतर होता था। दिन में गर्मी के बाद रात में ठंडी हवाएं चलती थीं, जिससे तापमान नीचे आ जाता था। लेकिन अब बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण कार्य, कंक्रीट के बढ़ते ढांचे और घटती हरियाली ने मौसम का संतुलन बिगाड़ दिया है।
उनका कहना है कि दिनभर सूर्य की गर्मी सोखने वाली इमारतें और सड़कें देर रात तक गर्मी छोड़ती रहती हैं। यही वजह है कि अब रात में भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही।
एसी और वाहनों की बढ़ती संख्या भी वजह
देहरादून और हरिद्वार दोनों शहरों में तेजी से बढ़ते एयर कंडीशनर भी तापमान बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। एसी से निकलने वाली गर्म हवा आसपास के वातावरण को और अधिक गर्म बना रही है। इसके साथ ही वाहनों की बढ़ती संख्या, ट्रैफिक जाम और चारधाम यात्रा के दौरान लाखों वाहनों की आवाजाही से प्रदूषण और गर्मी दोनों बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार हरिद्वार में तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों की बढ़ती संख्या के कारण होटल, धर्मशाला और व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं, जिससे शहर का तापमान पहले की तुलना में अधिक महसूस होने लगा है।
जंगल कटे, ठंडी हवाएं थमीं
एक समय हरियाली और जंगलों से घिरा देहरादून अब तेजी से कंक्रीट के जंगल में बदलता जा रहा है। यही हाल हरिद्वार के आसपास के क्षेत्रों का भी है। पेड़ों की कटाई और खुले क्षेत्रों में कमी के कारण हवा का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है। बड़े-बड़े भवन और घनी आबादी ठंडी हवाओं को रोक रहे हैं, जिससे उमस और गर्मी दोनों बढ़ती जा रही हैं।
आने वाले समय में बढ़ सकती है परेशानी
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अनियंत्रित शहरीकरण, जंगलों की कटाई और प्रदूषण पर रोक नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में देहरादून और हरिद्वार का मौसम और अधिक गर्म हो सकता है। कभी सुकून देने वाली रातों के लिए पहचाने जाने वाले ये शहर अब धीरे-धीरे मैदानी शहरों जैसी तपिश महसूस कराने लगे हैं।
