हरिद्वार, हर्षिता। योगगुरु स्वामी रामदेव, भाजपा सांसद कंगना रनौत और सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच चल रही जुबानी जंग के बीच अब बाबा रामदेव ने विवाद को आगे बढ़ाने से साफ इनकार किया है। हरिद्वार में आयोजित संत समागम में रामदेव ने कहा कि वह “ओछे लोगों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।” उन्होंने कहा कि स्वामी रामदेव क्या हैं और देश के लिए उनका योगदान क्या है, यह पूरा देश जानता है।
कंगना के बयान पर शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, कंगना रनौत के “जेनरेशन गटर” वाले बयान के बाद रामदेव ने उन पर निशाना साधते हुए इसे “बिगड़े हुए दिमाग की निशानी” बताया था। इसके बाद कंगना ने भी रामदेव पर पलटवार किया और दोनों के बीच बयानबाजी तेज हो गई।
इसी बीच बृजभूषण शरण सिंह की टिप्पणियों ने भी इस विवाद को और चर्चा में ला दिया। हालांकि अब रामदेव ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाने से दूरी बनाने का संकेत दिया है।
“संन्यासी को गाली देना नया फैशन बन गया”
रामदेव ने कहा कि आज के समय में संन्यासी को गाली देना और समाज में भेद की दीवारें खड़ी करना एक नया फैशन बन गया है। उन्होंने कहा कि यदि किसान, युवा, ब्राह्मण या दलित किसी के साथ अन्याय हो रहा है तो सभी को उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस तरह एससी-एसटी को गाली देना अपमान माना जाता है, उसी तरह किसी ब्राह्मण को गाली देना भी अपमान है। किसी भी व्यक्ति को गाली देना संविधान और लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।
वन नेशन-वन इलेक्शन का किया समर्थन
हरिद्वार में आयोजित वन नेशन-वन इलेक्शन संत समागम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संत समाज से इस मुद्दे पर सुझाव मांगे। रामदेव ने वन नेशन-वन इलेक्शन का समर्थन करते हुए कहा कि इससे देश की शिक्षा व्यवस्था को भी फायदा होगा।
रामदेव के मुताबिक, भारत में पूरे साल कहीं न कहीं चुनाव चलते रहते हैं, जिससे विकास योजनाएं प्रभावित होती हैं। उन्होंने दावा किया कि शिक्षकों का करीब 30 प्रतिशत समय चुनाव ड्यूटी में चला जाता है। यदि एक साथ चुनाव होंगे तो शिक्षकों का समय बचेगा और वे बच्चों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
“राजनीतिक स्वार्थ के लिए देशहित से समझौता नहीं”
रामदेव ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ राजनेताओं को लगता है कि वन नेशन-वन इलेक्शन लागू होने से अलग-अलग राज्यों में उनकी राजनीतिक संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि देश के मतदाताओं को बेवकूफ नहीं समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक स्वार्थ के लिए देश के हितों से समझौता नहीं किया जा सकता। रामदेव के अनुसार, संत समाज ने यह संदेश दूर तक पहुंचाने का निर्णय लिया है कि वन नेशन-वन इलेक्शन से देश तेजी से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के लिए चुनाव सुधार जरूरी हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने सड़कों और संसद में हंगामा कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को बाधित करने की ठान रखी है।
