हजारों परिवारों के आशियाने और भविष्य पर संकट का दावा, बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति ने आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
ऋषिकेश।harshita, बापूग्राम में वन भूमि विवाद को लेकर स्थानीय लोगों का आक्रोश एक बार फिर तेज हो गया है। बापूग्राम बचाओ संघर्ष समिति ने शासन-प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दी है। समिति ने स्पष्ट किया कि यदि प्रदेश सरकार न्यायालय में स्थानीय निवासियों के पक्ष में ठोस और प्रभावी पैरवी नहीं करती है, तो क्षेत्र के हजारों लोग आगामी विधानसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करने का फैसला ले सकते हैं।
1908 से पहले का आबादी क्षेत्र होने का दावा
20 बीघा स्थित एक वेडिंग प्वाइंट में आयोजित पत्रकार वार्ता में समिति के संयोजक रमेश जुगलान ने कहा कि बापूग्राम कोई नया बसा हुआ क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह वर्ष 1908 से पूर्व का आबादी क्षेत्र है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1950 में मीरा बहन के प्रयासों से क्षेत्र को आदर्श ग्राम का स्वरूप मिला। इसके बाद बापूग्राम को राजस्व गांव घोषित किया गया और बाद में इसे नगर निगम सीमा में भी शामिल किया गया।
15 हजार परिवारों और 70 हजार लोगों पर असर का दावा
समिति के अनुसार वन भूमि से जुड़े विवाद के कारण बापूग्राम के हजारों परिवारों के सामने आशियाने, आजीविका और भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। समिति का दावा है कि बापूग्राम के साथ बिंदुखत्ता और बग्गा-54 से जुड़े भूमि प्रकरणों का असर करीब 15 हजार परिवारों और लगभग 70 हजार लोगों पर पड़ रहा है।
सरकार की उच्चस्तरीय कमेटी पर भी सवाल
पत्रकार वार्ता में समिति ने प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक के बाद गठित उच्चस्तरीय सरकारी कमेटी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। पदाधिकारियों ने कहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित होने के बावजूद प्रभावित लोगों को अब तक इस प्रक्रिया में पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया है।
बैठकों और फैसलों का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग
समिति ने सरकार से मांग की कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी की अब तक हुई बैठकों की संख्या और प्रभावित परिवारों के हित में लिए गए निर्णयों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही समिति के प्रतिनिधियों को कमेटी में शामिल कर प्रभावित लोगों के साथ सीधे संवाद करने की मांग भी उठाई गई।
“आश्वासन नहीं, चाहिए ठोस समाधान”
समिति ने कहा कि बापूग्राम के लोगों को अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और न्यायसंगत समाधान चाहिए। समिति के मुताबिक यदि सरकार ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी नहीं की और उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इसके साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का निर्णय भी लिया जा सकता है।
समिति ने सरकार से मामले का जल्द समाधान निकालने और प्रभावित परिवारों के आशियाने एवं भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की है।

By DTI