मधुबनी।दिव्या टाइम्स इंडिया। 22 साल पहले घर से लापता हुआ शंकर आखिरकार लौट आया, लेकिन उसकी वापसी की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। ‘स्वर्ग’ से लौटे शंकर ने जब घर की चौखट पर कदम रखा तो मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। जिस बेटे के मिलने की उम्मीद परिवार ने लगभग छोड़ दी थी, वह ग्वालियर के ‘आश्रम स्वर्ग सदन’ से वापस अपने गांव पहुंचा। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने 22 साल पुराने बिछड़े रिश्ते को फिर से जोड़ दिया।
मामला मधुबनी के झंझारपुर प्रखंड के महेशपुरा गांव का है, जहां बुधवार का दिन पूरे गांव के लिए यादगार बन गया। करीब 22 साल पहले लापता हुए शंकर कुशवाहा की घर वापसी किसी चमत्कार से कम नहीं रही।
15 साल की उम्र में घर से हुआ था लापता
महेशपुरा निवासी राजेंद्र महतो के पुत्र शंकर तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं और उनकी दो बहनें हैं। स्वजन के मुताबिक, बचपन में दिमागी रूप से कमजोर होने के कारण करीब 22 वर्ष पहले 15 साल की उम्र में शंकर घर से लापता हो गए थे।
परिवार ने उन्हें खोजने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतता गया, परिवार की उम्मीद कमजोर होती गई, लेकिन मां की आंखों का इंतजार कभी खत्म नहीं हुआ।
उनका कोई सुराग नहीं मिला। समय बीतता गया, परिवार की उम्मीद कमजोर होती गई, लेकिन मां की आंखों का इंतजार कभी खत्म नहीं हुआ।
ग्वालियर में मिला नया सहारा
किस्मत शंकर को मध्य प्रदेश के ग्वालियर ले गई। करीब आठ वर्षों से वह ग्वालियर के ‘आश्रम स्वर्ग सदन’ में रह रहे थे।
आश्रम के संचालक विकास गोस्वामी और पवन सूर्यवंशी ने उन्हें ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर बीमार और लाचार हालत में देखा था। दोनों उन्हें आश्रम लेकर आए, जहां उनका इलाज कराया गया। धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार हुआ और शंकर आश्रम में ही रहकर सेवाकार्यों में सहयोग करने लगे।
सोशल मीडिया वीडियो बना परिवार से मिलन का सेतु
शंकर की घर वापसी की सबसे अहम कड़ी बना इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो।
ग्वालियर में तैनात डीएसपी संतोष कुमार पटेल ने आश्रम में रहने वाले लोगों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। वीडियो किसी तरह मधुबनी के झंझारपुर तक पहुंचा।
वीडियो में शंकर को देखते ही परिवार ने उन्हें पहचान लिया। इसके बाद स्वजन ने तत्काल डीएसपी और आश्रम संचालकों से संपर्क किया। पहचान और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ललित शास्त्री ग्वालियर पहुंचे और अपने भाई को लेकर गांव लौट आए।
ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ बेटे का स्वागत
22 साल बाद शंकर के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ उनका स्वागत किया। माला पहनाए गए शंकर को देखने के लिए गांव की गलियों में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
जिस मां ने बेटे को 22 वर्षों तक अपनी आंखों में तलाशा था, उसने जब उसे सामने देखा तो भावनाओं का बांध टूट गया। मां ने बेटे को गले लगा लिया। पिता की आंखें भी नम थीं और भाई-बहनों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी।
यह सिर्फ एक बेटे की घर वापसी नहीं थी, बल्कि 22 वर्षों के इंतजार, उम्मीद और मां की ममता की जीत थी।
सोशल मीडिया को लेकर अक्सर उठने वाले सवालों के बीच यह घटना एक सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है कि इंटरनेट मीडिया कभी-कभी बिछड़े लोगों को उनके अपनों तक पहुंचाने का माध्यम भी बन सकता है।
