हरिद्वार ,हर्षिता,हरिद्वार कोरोना वायरस जहां एक ओर मरीज की जान का दुश्मन बना हुआ है। वहीं, कोरोना के उपचार में इस्तेमाल होने वाली सभी खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर दवाएं आदि सभी महंगी हो गई है, जिसके चलते कोरोना संक्रमित मरीजों को बीमारी के साथ-साथ अब महंगाई की भी मार झेलनी पड़ रही है।
कोरोना संक्रमित मरीजों की जेबें खाली हो रही हैं। उपचार तो महंगा है ही, साथ ही इस बीमारी में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली सभी खाने-पीने की वस्तुएं एवं दवा आदि आसमान छू रही हैं। विटामीन सी के स्रोत नींबू एवं संतरे के भाव दोगुने से भी अधिक हो चुके हैं। संतरा 100 रुपये से डेढ़ सौ रुपये किलो तक बिक रहा है। वहीं नींबू अब पांच रुपये से 10 रुपये में एक मिल रहा है। यही नहीं विटामीन सी की टेबलेट का जो पत्ता मात्र 15-20 रुपये का मिल रहा था। वह अब 70 रुपये तक हो गया है। नारियल इस मौसम में 40 से 50 रुपये तक मिल जाता था। लेकिन अब इसके रेट भी 100 रुपये तक पहुंच गए हैं। ओआरएस का बड़ा पैकेट भी 30 रुपये का हो गया है, जबकि पहले यह मात्र 15 रुपये का था। इसी तरह से काढ़ा बनाने में इस्तेमाल होने वाली सभी वस्तुएं भी महंगी हो गई है। वहीं सैनिटाइजर और फेस मास्क भी पहले के मुकाबले काफी महंगे हो गए हैं। जबकि ऑक्सीजन सिलिडर, ऑक्सीमीटर, फ्लोमीटर आदि का तो कोई रेट ही नहीं है। ऑक्सीजन सिलिडर व फ्लोमीटर मूंह मांगे दामों में बिक रहे हैं। फ्लोमीटर 20 दिन पहले तक 600 से 700 रुपये का था। लेकिन अब इसकी कीमत पांच से सात हजार रुपये हो चुकी है। यहां तक कि बुखार चेक करने वाला डिजिटल थर्मामीटर 200 और पारा वाला थर्मामीटर 80 रुपये का हो गया है।