देहरादून: हर्षिता ।जल जीवन मिशन कार्यालय पर सोमवार को काफी हंगामा हुआ. ठेकेदारों ने मिशन निदेशक विशाल मिश्रा की मौजूदगी में ताला जड़ दिया. आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन के तहत विभाग द्वारा ठेकेदारों से काम करवाने के बाद भुगतान नहीं किया गया है. विभाग पर प्रदेश भर के तकरीबन 500 ठेकेदार का 1200 करोड़ रुपए की देनदारी है.

सोमवार को देहरादून, इंदर रोड जल जीवन मिशन कार्यालय पर देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से धरना प्रदर्शन किया गया और ठेकेदारों ने कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया. इस दौरान परियोजना निदेशक आईएएस अधिकारी विशाल मिश्रा घंटों तक कार्यालय में फसे रहे. ठेकेदारों ने आरोप लगाया कि उन्होंने रात दिन एक करके सरकार की ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना को धरातल पर उतारा है, लेकिन अब काम हो जाने के बाद विभाग द्वारा भुगतान नहीं किया जा रहा है. उत्तराखंड के तकरीबन 500 ऐसे ठेकेदार हैं, जिन्होंने विभाग द्वारा निकाली गई निविदाओं के क्रम में काम किया है. इस पर ‘जल जीवन मिशन’ कार्यालय पर करीब 1200 करोड़ की देनदारी बनी हुई है.

जल जीवन मिशन से जुड़े ठेकेदारों ने उनके ऊपर विभागों द्वारा अत्याचार, ग्राम प्रधानों द्वारा योजना को वेरिफाई कराने में आ रही परेशानियों को लेकर भी अपनी बात रखी. ठेकेदारों ने मिशन डायरेक्टर विशाल मिश्रा को ज्ञापन भी दिया.

बातचीत करते हुए ठेकेदार संघ के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश में पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट जल जीवन मिशन को धरातल पर उतारने के लिए राज्य के ठेकेदारों ने अपनी क्षमता से कई अधिक तन, मन और धन लगाकर बहुत जिम्मेदारी के साथ काम किया. लेकिन बहुत खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि ठेकेदारों को समय-समय पर यह आश्वासन दिया गया कि जियो-टैगिंग पूरी होने के बाद भुगतान किया जाएगा. उसके बाद कहा गया कि केएमएल फाइल तैयार होने के बाद पेमेंट की जाएगी. लेकिन अब फिर से टाला जा रहा है. इस तरह से ठेकेदारों को पिछले दो सालों से पेमेंट नहीं किया गया है. इससे सरकार की मंशा स्पष्ट प्रतीत नहीं हो रही है. इन परिस्थितियों में ठेकेदारों को गंभीर आर्थिक संकट से गुजरना पड़ रहा है.

इस पूरे मामले पर मिशन निदेशक विशाल मिश्रा ने कहा कि, इस योजना में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा अपने अपने मद में भुगतान किया जाता है. राज्य द्वारा अपना अंश पूरा किया जा चुका है, लेकिन केंद्र वाला वित्तीय अंश आना बाकी है, जिसको लेकर लगातार केंद्र से पत्राचार किया जा रहा है.

इस संबंध में शासन स्तर पर भी प्रस्ताव भेजे गए हैं, जो कि लंबित हैं. कुछ जगहों पर मानकों को लेकर शिकायत थी, लेकिन परीक्षण के बाद स्पष्ट हो चुका है कि किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है. लेकिन शासन द्वारा फंड जारी नहीं किया जा रहा है. -विशाल मिश्रा, निदेशक, जल जीवन मिशन परियोजना

By DTI