हरिद्वार, हर्षिता। : गर्मियों का सीजन आते ही बाजारों में लाल-लाल तरबूज की भरमार हो जाती है। लोग इसे स्वाद और ठंडक के लिए खूब खरीदते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो तरबूज आप खा रहे हैं वो प्राकृतिक रूप से पका है या फिर उसे केमिकल और इंजेक्शन से लाल किया गया है?
आजकल मुनाफे के लालच में कुछ कारोबारी तरबूज को जल्दी पकाने के लिए उसमें केमिकल, रंग और मिठास बढ़ाने वाले पदार्थों का इस्तेमाल कर रहे हैं। बाहर से बिल्कुल ताजा दिखने वाला तरबूज अंदर से आपकी सेहत के लिए खतरा बन सकता है।
हो सकती हैं ये गंभीर समस्याएं
मिलावटी तरबूज खाने से आपको—
फूड पॉइजनिंग
पेट दर्द
उल्टी
दस्त
इंफेक्शन
कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को इससे ज्यादा खतरा हो सकता है।
ऐसे पहचानें असली और नकली तरबूज

  1. टिश्यू पेपर टेस्ट
    तरबूज कटवाने के बाद उस पर टिश्यू पेपर रखें।
    ➡️ अगर टिश्यू लाल या नारंगी हो जाए तो समझिए उसमें रंग मिलाया गया हो सकता है।
    ➡️ अगर रंग ना बदले तो तरबूज सुरक्षित हो सकता है।
  2. पानी टेस्ट
    तरबूज का छोटा टुकड़ा पानी में डालें।
    ➡️ अगर पानी लाल होने लगे तो सावधान हो जाएं।
    ➡️ असली तरबूज पानी का रंग नहीं बदलता।
  3. बाहरी रंग और डंठल देखें
    ✔️ सूखी पीली डंठल = प्राकृतिक रूप से पका तरबूज
    ✔️ नीचे पीला धब्बा = सही तरीके से पका फल
    ⚠️ हरी डंठल, बहुत ज्यादा लाल गूदा और सफेद बीज = शक की निशानी हो सकती है।
    खरीदते समय रखें सावधानी
    तरबूज हमेशा भरोसेमंद दुकानदार से खरीदें और बिना जांचे कटे हुए फल खाने से बचें।
    थोड़ी सी सावधानी आपको और आपके परिवार को बड़ी बीमारी से बचा सकती है। गर्मियों में तरबूज खाएं… लेकिन समझदारी के साथ।

By DTI