विजयादशमी उत्सव में सैकड़ों स्वयंसेवकों ने लिया भाग, पुष्पवर्षा और देशभक्ति गीतों से हुआ स्वागत
हरिद्वार, 18 अक्टूबर 2026, हर्षिता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस एवं विजयादशमी के अवसर पर चाणक्य शाखा, हरिद्वार क्षेत्र की ओर से शस्त्र पूजन एवं भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। आर्यनगर कॉलोनी, नंदपुरी कॉलोनी और मयूर विहार कॉलोनी क्षेत्र में निकले पथ संचलन में पूर्ण गणवेश में सैकड़ों स्वयंसेवकों ने भाग लिया। अनुशासित कदमताल के साथ निकले स्वयंसेवकों का स्थानीय नागरिकों ने पुष्पवर्षा और देशभक्ति गीतों के माध्यम से स्वागत किया।
शस्त्र पूजन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत शस्त्र पूजन के साथ हुई। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता के संदेश पर जोर दिया गया। पथ संचलन के दौरान स्वयंसेवकों की एकरूपता और अनुशासित स्वरूप आकर्षण का केंद्र रहा। विभिन्न स्थानों पर क्षेत्रवासियों द्वारा किए गए स्वागत से कार्यक्रम का माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा।
रोहिताश्व कुँवर चौहान ने बताए विजयादशमी के आदर्श
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं पूर्व जिला संघचालक रोहिताश्व कुँवर चौहान ने विजयादशमी के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जीवन और आदर्शों का उल्लेख करते हुए स्वयंसेवकों से सत्य, न्याय, त्याग, मर्यादा और कर्तव्यपरायणता को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विजयादशमी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करने और समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने का पर्व है। प्रभु श्रीराम का जीवन कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।
राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान
रोहिताश्व कुँवर चौहान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि, विचारधारा, संगठनात्मक कार्यपद्धति तथा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में संघ और उसके आनुषांगिक संगठनों की भूमिका पर भी चर्चा की।
उन्होंने संघ के मूल भाव ‘इदं राष्ट्राय, इदं न मम’ अर्थात ‘यह राष्ट्र के लिए है, मेरे लिए नहीं’ का उल्लेख करते हुए राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था का कार्य नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। जरूरतमंदों की सहायता, सामाजिक एकता, सेवा और संस्कारों को मजबूत करना प्रत्येक स्वयंसेवक का महत्वपूर्ण दायित्व है।
ज्ञानेश्वर ठकराल ने जताया आभार
कार्यक्रम में नगर संघचालक एवं अधिवक्ता ज्ञानेश्वर ठकराल ने स्वयंसेवकों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलने तथा समाज और राष्ट्र की सेवा में निरंतर सक्रिय रहने की प्रेरणा दी।
उन्होंने संगठनात्मक एकता, सामाजिक सद्भाव, अनुशासन और सेवा भावना को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्वयंसेवकों को अपने विचारों, व्यवहार और कार्यों से समाज में सकारात्मकता का प्रसार करना चाहिए।
गीत, अमृत वचन और अनुशासन ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा
कार्यक्रम में मुख्य शिक्षक की भूमिका श्री अमरेश कुमार ने निभाई, जबकि मंच का परिचय शाखा कार्यवाह श्री राजेन्द्र रूहेला ने प्रस्तुत किया। डॉ. अश्वनी ने एकल गीत प्रस्तुत किया और श्री प्रिय पराक्ष ने अमृत वचन का वाचन किया।
पूरे आयोजन में अनुशासन और उत्साह का वातावरण बना रहा। पथ संचलन के मार्ग में स्थानीय नागरिकों द्वारा पुष्पवर्षा और देशभक्ति गीतों के माध्यम से किया गया स्वागत कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।
अनेक स्वयंसेवक और गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर बस्ती प्रमुख श्री ब्रह्मपाल, सह बस्ती प्रमुख श्री वेदपाल, व्यवस्था प्रमुख श्री देवी प्रसाद, पार्षद पति श्री सतेन्द्र चौधरी, नगर संपर्क प्रमुख श्री सुशील सैनी, पार्षद श्री आकाश चौहान, पार्षद श्री अनुज सिंह, उपनगर शारीरिक प्रमुख श्री उमेश मिश्रा, नगर कार्यवाह डॉ. अनुराग सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, स्वयंसेवक और क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त श्री धनवीर, डॉ. सुधीर रूहेला, श्री सतीश गोला, श्री सतीश चौहान, श्री सतीश गुप्ता, श्री सतीश त्यागी, श्री अभिषेक त्यागी, श्री प्रमोद चौहान, श्री प्रमोद त्यागी, श्री ब्रजकिशोर, श्री सुभाष, श्री होशियार सिंह, श्री अशोक गुप्ता, श्री अभिनव, श्री मानस गोयल, डॉ. मोहित, डॉ. आलोक, श्री सत्यप्रकाश, श्री ओमप्रकाश, श्री विनोद शर्मा, श्री कार्तिक, श्री अतुल चौहान, श्री विशाल राठौर, श्री दीपक राजपूत और श्री अरविंद सैनी समेत अनेक लोग मौजूद रहे।
राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ हुआ समापन
विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वयंसेवकों में राष्ट्रभक्ति, संगठनात्मक अनुशासन, सेवा, सामाजिक समरसता और कर्तव्यबोध की भावना को मजबूत करना रहा। पथ संचलन का समापन राष्ट्रसेवा, संगठनात्मक एकता और समाज के प्रति समर्पण के संकल्प के साथ हुआ।
