चंडीगढ़, संजीव मेहता। पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने अपने पंज प्यारे वाले बयान पर माफी मांग ली है। रावत ने मंगलवार को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिद्धू और कार्यकारी अध्यक्षों के लिए पंज प्यारे शब्द का इस्तेमाल किया था। जिसके बाद विवाद और तेज हो गया था। विपक्षी दलों ने रावत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
अकाली दल ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में रावत के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग तक कर डाली है। विवाद को बढ़ता देख बुधवार को रावत ने अपने बयान को लेकर माफी मांगते हुए कहा है कि उन्होंने गलती की है। वे अपनी गलती के लिए माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने राज्य उत्तराखंड में गुरु के घर में झाड़ू लगाकर अपनी इस गलती का प्रायश्चित करेंगे।
उन्होंने कहा कि उनकी मंशा किसी की तुलना पंज प्यारों से करने की नहीं थी।
पंज प्यारे खालसा सिख धर्म के विधिवत दीक्षाप्राप्त अनुयायियों का सामूहिक रूप है। खालसा पंथ की स्थापना श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल 1699 को बैसाखी वाले दिन श्री आनंदपुर साहिब में की। इस दिन उन्होंने सर्वप्रथम पंज प्यारों को अमृतपान करवा कर खालसा बनाया और इसके बाद उन पंज प्यारों के हाथों से स्वयं भी अमृतपान किया।
मुझसे कल अपने माननीय अध्यक्ष व चार कार्यकारी अध्यक्षों के लिए पंज प्यारे शब्द का उपयोग करने की गलती हुई है। मैं देश के इतिहास का विद्यार्थी हूं और पंज प्यारों के अग्रणी स्थान की किसी और से तुलना नहीं की जा सकती है। मुझसे ये गलती हुई है, मैं लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए क्षमा प्रार्थी हूं। मैं अपने राज्य उत्तराखंड में गुरु के घर में झाड़ू लगाकर अपनी इस गलती का प्रायश्चित करूंगा। हरीश रावत, पंजाब कांग्रेस प्रभारी