दिव्या टाइम्स इंडिया।पालम में लगी भीषण आग ने एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों को खत्म कर दिया। एक घर, पांच भाई और किस्मत का ऐसा खेल कि कुछ हमेशा के लिए बिछड़ गए, तो कुछ चमत्कारिक रूप से बच निकले।
परिवार के मुखिया राजेंद्र कश्यप जब गोवा से लौटे, तो सामने था जला हुआ घर… और भीतर 9 अपनों की निर्जीव देह। इस हादसे ने उनके पूरे जीवन को एक झटके में उजाड़ दिया।
🔥 9 जिंदगियां बुझीं, घर बना राख
नई दिल्ली के इस दर्दनाक हादसे में कश्यप की पत्नी, दो बेटे, एक बेटी, दो बहुएं और तीन मासूम पोतियां जिंदा जल गईं।
घर की दीवारें आज भी उस चीख-पुकार की गवाह हैं, जो कुछ ही मिनटों में सब कुछ खत्म कर गई।
😢 बचाने की कोशिश, लेकिन…
आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला।
एक बेटे ने अपनी 1 साल की बेटी को बचाने के लिए छलांग लगा दी, खुद गंभीर घायल हो गया
दूसरे बेटे ने पड़ोसी इमारत में कूदकर जान बचाई, लेकिन बुरी तरह झुलस गया
दमकल की कोशिशें भी वक्त के आगे हारती नजर आईं
🌄 एक छुट्टी बनी ‘चमत्कार’
कश्यप का एक बेटा सुनील, अपने परिवार के साथ हिमाचल में था
👉 अगर वह घर पर होता, तो शायद आज जिंदा नहीं होता
इसी तरह, एक बहू और उसका बच्चा भी मायके में होने के कारण बच गए
👉 किस्मत ने कुछ को बचाया, लेकिन बदले में बहुत कुछ छीन लिया
⚠️ आग या लापरवाही?
शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट वजह बताया जा रहा है
इमारत में सिर्फ एक ही एंट्री-एग्जिट
नीचे दुकान और ऊपर रहन-सहन — नियमों की खुली अनदेखी
👉 सवाल उठ रहे हैं:
क्या ये हादसा था… या सिस्टम की नाकामी?
🏛️ सियासत भी गरम
विपक्ष ने इसे “हादसा नहीं, हत्या” बताया
दमकल विभाग पर सवाल
सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए
पूरे दिल्ली में फायर सेफ्टी ऑडिट की तैयारी
🧩 अब बचा क्या है?
जो लोग बचे हैं, उनके सामने अब सबसे बड़ा सवाल है—
👉 टूटे हुए जीवन को फिर से कैसे जोड़ा जाए?
यह सिर्फ एक आग नहीं थी…
यह एक पूरा परिवार, एक इतिहास और कई सपनों का अंत था।

By DTI