देहरादून: Kedarnath Temple यात्रा मार्ग पर स्थित Lincholi क्षेत्र को लेकर वैज्ञानिकों ने बड़ा अलर्ट जारी किया है। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी की स्टडी में खुलासा हुआ है कि यह इलाका हिमस्खलन (Avalanche) के लिहाज से बेहद संवेदनशील बन चुका है और यहां से गुजरने वाले हजारों श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, लिंचोली क्षेत्र में हर साल सर्दियों से शुरुआती गर्मियों तक भारी बर्फ जमा होती है। अप्रैल से जून के बीच तापमान बढ़ने पर बर्फ अस्थिर हो जाती है, जिससे पाउडर स्नो और वेट स्नो एवलांच का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
Wadia Institute of Himalayan Geology के वरिष्ठ ग्लेशियोलॉजिस्ट Dr. Manish Mehta की स्टडी के अनुसार, हिमस्खलन करीब 4160 मीटर की ऊंचाई से शुरू होकर 3250 मीटर तक आता है और लगभग 1.5 किलोमीटर क्षेत्र को प्रभावित करता है।
रिपोर्ट में साल 2021 की दर्दनाक घटना का भी जिक्र है, जब गिर्थी गंगा क्षेत्र में एवलांच आने से 16 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 384 लोगों को सुरक्षित निकाला गया था। इसके अलावा Hemkund Sahib मार्ग और त्रिशूल पर्वत क्षेत्र की घटनाओं ने भी चिंता बढ़ाई है।
सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि मई-जून के दौरान करीब 60% श्रद्धालु केदारनाथ पहुंचते हैं और इसी दौरान रामबाड़ा से केदारनाथ तक के रास्ते में हर मिनट 100 से 200 यात्री इस एवलांच जोन से गुजरते हैं। ऐसे में किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।
वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि प्रस्तावित रोपवे टावरों को एवलांच क्षेत्र से 200-300 मीटर दूर बनाया जाए, वैकल्पिक पैदल मार्ग तैयार किया जाए और सुरक्षा संरचनाओं को मजबूत किया जाए।
आस्था के इस बड़े केंद्र पर अब सिर्फ श्रद्धा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक सुरक्षा इंतजाम भी बेहद जरूरी हो गए हैं। 🚨

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By DTI