हरिद्वार/बेलारी, हर्षिता ।कभी घर की तंगी से परेशान होकर बिना किसी को बताए घर छोड़ देने वाला 18 वर्षीय लड़का शंकर आचारी, आज स्वामी राजन पुरी महाराज बनकर जब 20 साल बाद अपने घर लौटा — तो न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरा गाँव भावुक हो उठा।
20 लंबे वर्षों के बाद वह अब साधु के रूप में, लंबी दाढ़ी, केसरिया वस्त्र और शांत चेहरे के साथ अपने घर के दरवाजे पर खड़ा था।
जिस शंकर को परिवार रोज़ याद करता था, उसी शंकर को अचानक सन्यासी रूप में देखकर सबकी आँखें नम हो गईं।
🌼 कैसे बना शंकर सन्यासी?
शंकर आचारी, कुरुगोड के चंद्रशेखरचारी और चंद्रकला के इकलौते बेटे थे। परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था — जिम्मेदारियों का बोझ, रोज़ी-रोटी की चिंता और उम्मीद की तलाश में शंकर बेंगलुरु गया।
लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया…
फिर वह मुंबई गया और धीरे-धीरे परिवार से पूरी तरह दूर हो गया।
🔶 हरिद्वार में 7 साल की साधना
मुंबई के बाद शंकर उत्तराखंड के हरिद्वार पहुँचा — और यहीं उसकी जिंदगी ने मोड़ लिया।

  • वह 7 साल तक साधना में लीन रहा
  • निरंजन देव नामक गुरु से दीक्षा ली
  • और आधिकारिक रूप से सन्यासी बन गया
    यहीं से जन्म हुआ — स्वामी राजन पुरी महाराज का।
    🛕 अब अहमदाबाद के कुंडेश्वर मंदिर में सेवा
    स्वामीजी ने बताया कि बीते 8 साल से वह गुजरात के अहमदाबाद में कुंडेश्वर मंदिर में डिप्टी हेड के रूप में सेवा कर रहे हैं।
    जीवन पूरी तरह धर्म, सेवा, और साधना को समर्पित है।
    🤝 फेसबुक ने मिलवाया परिवार से
    तकदीर ने डिजिटल रास्ता चुना —
    स्वामीजी की मुलाकात फेसबुक पर कुंभार बसवराज नाम के व्यक्ति से हुई, जिन्होंने बताया कि वे उसी कुरुगोड क्षेत्र से हैं।
    जब बातचीत आगे बढ़ी, तो उन्होंने ही शंकर की जानकारी उसके परिवार तक पहुंचाई और उन्हें गाँव आने का निमंत्रण भी दिया।
    और फिर…
    20 साल बाद, स्वामीजी अपने घर लौटे।
    ❤️ घर वापसी का भावुक पल
    शंकर को उसके सन्यासी स्वरूप में देखकर
  • उसके माता-पिता
  • रिश्तेदार
  • पड़ोसी
  • और पूरा गाँव
    अचंभित रह गया।
    जिस बेटे को एक दिन अचानक खो दिया था, आज वही बेटा साधु बनकर उनके सामने खड़ा था।
    🙏 स्वामीजी का आशीर्वचन
    स्वामी राजन पुरी महाराज ने कहा —
    “मुझे अपने कुलदेवता के दर्शन का सौभाग्य मिला। परिवार की प्रेम-भरी नजरें देखकर मन भर आया। तीन दिन बाद पुनः अपने मंदिर लौट जाऊँगा।”
    🌟 एक ऐसा जीवन, जो भटकाव से शुरू हुआ… और अध्यात्म में समा गया
    शंकर की कहानी सिर्फ घर छोड़ने और लौटने की नहीं —
    यह भटकते हुए आत्मा के अपने सच्चे मार्ग को खोजने की कहानी है।
    वह साधारण युवक से साधु बना, और अब हजारों लोगों को आध्यात्मिक मार्ग दिखा रहा है।

By DTI