नैनीडान्डा,पौड़ी गढ़वाल-प्रभुपाल सिंह रावत।हम आपको एक रहस्यमयी शिवलिंग गुफा,जल कुंड व उसके अन्दर प्राकृतिक हाल(कमरा) की जानकारी से रूबरू करवाते हैं।नैनीडान्डा प्रखंड के ग्राम पोखार और ग्राम ढंगल गाँव के घने जंगल के बीच स्थित प्राचीन शिवलिंग गुफा युक्त जल कुंड है जिसे स्थानीय जन मानस देवीढौर नाम से जानते है और पुकारते हैं।यहाँ इस भारी भरकम गुफा के अन्दर एक जल कुंड व बड़ा कमरा नुमा हाल भी है जिसमे तीस चालीस आदमी आराम से बैठ सकते हैं।

आमतौर पर ग्राम पोखार के लोग ही गुफा के आसपास की साफ सफाई,मरम्मत आदि का काम करते हैं,ये भी धनाभाव के कारण ज्यादा कुछ नहीं कर पाते।यहाँ प्राचीन शिवलिंग के साथ पानी का कुंड ही विशेष आकर्षण का केंद्र है।अगर यहाँ सड़क,विद्युतीकरण व सौन्दर्यकरण किया जाये तो गुफा में चार चाँद लग सकते हैं।स्थानीय ग्रामीण कहते है कि यहाँ आने वाले भक्तो की मन्नते भी पूरी होती हैं इनके पूर्वज कहा करते थे कि इस देवीढौर की रक्षा मणि वाले साँप करते हैं।

यह एक प्राकृतिक व प्राचीन गुफा है लेकिन प्रचार प्रसार,सौन्दर्यकरण व रखरखाव के अभाव में कोई ज्यादा पहचान व प्रसिद्धि प्राप्त नहीं कर सका।यहाँ पहुँचने के लिए धुमाकोट बाजार से खाल्योडाडा तक पहुंचा जा सकता है।खाल्योडाडा बाजार से पैदल तीन किलोमीटर की दूरी तय करके इस प्राचीन शिवलिंग गुफा के दर्शन हो सकते हैं।स्थानीय लोग शिवरात्रि पर्व पर या अन्य शुभ अवसरों पर यहाँ भंडारे भोजन का कार्यकर्म भी करते रहते हैं।यहाँ का प्राकृतिक नजारा देखते ही श्रद्धालु अभिभूत,अलोकिक हो जाते हैं।ये जो जल कुंड है भीष्ण गर्मी में भी सूखता नहीं है गुफा के भीतर झुक कर जाना होता है।

अभी तक किसी क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि व प्रशासन ने इसके सौन्दर्यकरण,प्रचार प्रसार पर ध्यान देने की ज़हमत नहीं की।लोग कहते हैं कि यदि इस गुफा का सौन्दर्यकरण हुआ होता तो इस क्षेत्र की व गुफा की एक अलग ही विशेष पहचान होती अब ये सिर्फ गुफा तक ही सीमित रह गया है।न इसकी कोई जान पहचान है न कोई करने को सोच भी नहीं रहा।अब शायद क्या पता इस खबर के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि व प्रशासन के आंख कान खुल जाये ये अभी हम कुछ कह नहीं सकते या ऐसे ही विलुप्त होता चले जाये।ये नैनीडान्डा के लोग बखुबी जानते हैं।

By DTI

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