देहरादून:/ऋषिकेश, हर्षिता।उत्तराखंड का यह मॉनसून सीजन किसी काली याद से कम नहीं। बरसात ने यहां ऐसी चोटें दी हैं जिन्हें भरने में शायद सालों लग जाएं। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक—हर जगह बादलों का कहर टूट पड़ा, जिसने न सिर्फ इंसानी जिंदगी छिनी बल्कि पूरे-पूरे इलाकों का नक्शा तक बदलकर रख दिया।
🕯️ तबाही का आंकड़ा
अब तक 75 लोग मौत के शिकार
90 से ज्यादा लापता, सर्च ऑपरेशन जारी
107 से अधिक घायल, अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती
1430 से अधिक मवेशियों की मौत
🏚️ घर और खेत भी बर्बाद
226 मकान पूरी तरह तबाह, 31 घरों में बड़ी दरारें
1828 मकान मरम्मत के इंतजार में
190 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ की भेंट, किसानों की कमर टूटी
कई गांव आज भी जिला मुख्यालयों से कटे हुए
💰 विभागवार नुकसान (अब तक)
PWD (लोक निर्माण विभाग): ₹554.38 करोड़
ऊर्जा विभाग: ₹448 करोड़
PMGYSY: ₹415 करोड़
सिंचाई विभाग: ₹400+ करोड़
पेयजल निगम: ₹90 करोड़
लघु सिंचाई: ₹35 करोड़
पंचायती राज विभाग: ₹10 करोड़
👉 कुल नुकसान हजारों करोड़ तक पहुंचने का अनुमान।
🌩️ खतरा अभी बाकी
मौसम विभाग ने 2 सितंबर तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कई जिलों से अभी नुकसान की रिपोर्ट आना बाकी है, यानी आपदा का यह हिसाब और भी लंबा हो सकता है।
🏞️ साल की बड़ी घटनाएं
5 अगस्त, धराली (उत्तरकाशी): 6 मौत, 65 लोग लापता
स्याना चट्टी (उत्तरकाशी): यमुना का प्रवाह रुका, झील बनी, पूरा कस्बा जलमग्न
हाईवे हादसा: पहाड़ से पानी का सैलाब, 7 मजदूर बह गए, अब तक लापता
घर पर मलबा गिरा (उत्तरकाशी): 3 लोगों की मौत
चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी: कई जानें गईं
सबसे ज्यादा नुकसान और मौतें उत्तरकाशी में दर्ज हुई हैं।
🆘 सरकार की तैयारी
मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने कहा कि प्रभावित परिवारों का पुनर्वास प्लान तैयार किया जा रहा है। नुकसान का पूरा ब्यौरा केंद्र सरकार को भेजकर आपदा राहत मद से मदद मांगी जाएगी।
📌 साफ है—उत्तराखंड का यह मॉनसून सिर्फ बरसात नहीं, बल्कि तबाही का तांडव साबित हुआ है।