Divya Times India। Allahabad High Court ने धर्म परिवर्तन और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) लाभ को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जो व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से हटकर अन्य धर्म अपनाता है, उसे SC/ST के लाभ का अधिकार नहीं रहेगा।
⚖️ कोर्ट की प्रमुख टिप्पणी
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने कहा कि
👉 “लाभ के उद्देश्य से धर्म परिवर्तन करना संविधान के साथ धोखा है।”
👉 धर्म बदलने के बाद भी SC/ST का लाभ लेना नियमों के खिलाफ है।
📌 जिलाधिकारियों को निर्देश
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DM) को आदेश दिया है कि:
4 महीने के भीतर ऐसे लोगों की पहचान करें
जो धर्म बदलने के बाद भी SC/ST लाभ ले रहे हैं
दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करें
🔍 महाराजगंज केस क्या है?
महाराजगंज निवासी एक व्यक्ति पर आरोप है कि:
उसने ईसाई धर्म अपनाने के बाद भी खुद को हिंदू बताया
SC/ST एक्ट के तहत आवेदन किया
कोर्ट में दाखिल हलफनामे और पुलिस जांच में विरोधाभास पाया गया
गवाहों के अनुसार, संबंधित व्यक्ति पादरी के रूप में कार्य कर रहा था और लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहा था।
⚠️ कोर्ट का सख्त रुख
कोर्ट ने कहा कि:
इस तरह के मामलों में “संविधान के साथ धोखाधड़ी” बर्दाश्त नहीं होगी
भविष्य में ऐसे फर्जी हलफनामों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी
📚 कानूनी आधार
👉 संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के तहत
केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लोगों को SC का दर्जा मिलता है
अन्य धर्म अपनाने पर यह दर्जा समाप्त हो सकता है
🧾 आगे क्या?
डीएम अपनी जांच रिपोर्ट 4 महीने में मुख्य सचिव को सौंपेंगे
दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है
🔻 निष्कर्ष
हाईकोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि
👉 आरक्षण का लाभ केवल वास्तविक पात्रों को ही मिलेगा
👉 नियमों का गलत इस्तेमाल करने वालों पर अब कड़ी नजर रहेगी

By DTI