नई दिल्ली/कोलकाता:, दिव्या टाइम्स इंडिया।पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार भारतीय जनता पार्टी की बढ़त के पीछे सिर्फ चुनावी लहर नहीं, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की बेहद सटीक और बूथ स्तर तक तैयार की गई रणनीति को बड़ा कारण माना जा रहा है। पिछले एक दशक में Amit Shah ने भाजपा के सबसे सफल चुनावी रणनीतिकार के तौर पर अपनी पहचान बनाई है और बंगाल में भी उन्होंने उसी फॉर्मूले को नए अंदाज में लागू किया।
सूत्रों के मुताबिक, शाह ने बंगाल में करीब 15 दिन तक डेरा डाला और सिर्फ जनसभाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पर्दे के पीछे पूरा चुनावी वॉर रूम संभाला। उत्तर बंगाल, जंगलमहल, सीमावर्ती इलाकों और औद्योगिक जिलों की अलग-अलग रणनीति बनाई गई। भाजपा ने पहले ही जीतने योग्य और कड़ी टक्कर वाली सीटों की पहचान कर ली थी और शाह का पूरा फोकस इन्हीं सीटों पर रहा। देर रात तक संगठन बैठकों का दौर चलता रहा और हर बूथ का फीडबैक सीधे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचता रहा।
चुनाव प्रचार के दौरान Amit Shah ने 50 से ज्यादा कार्यक्रम किए, जिनमें 30 जनसभाएं, 12 रोड शो, संगठनात्मक बैठकें और प्रेस कॉन्फ्रेंस शामिल रहीं। प्रधानमंत्री Narendra Modi के बाद भाजपा की सबसे ज्यादा भीड़ वाली सभाएं शाह की ही मानी जा रही हैं। मतदान के दिन भी शाह वॉर रूम में मौजूद रहकर पूरे चुनावी समीकरण पर नजर बनाए हुए थे।
भाजपा की असली ताकत इस बार बूथ मैनेजमेंट रही। पार्टी ने बड़े चेहरों के बजाय स्थानीय पकड़ रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी। हर बूथ पर 200 से 300 वोट जुटाने की क्षमता को टिकट का पैमाना बनाया गया। 2021 की हार से सबक लेते हुए पार्टी ने दलबदलुओं और सेलिब्रिटी उम्मीदवारों पर निर्भरता कम की और संगठन को फिर से मजबूत किया।
इस बार भाजपा ने अपने चुनावी नैरेटिव में भी बड़ा बदलाव किया। Mamata Banerjee पर व्यक्तिगत हमलों से दूरी बनाई गई और फोकस कानून व्यवस्था, घुसपैठ, महिला सुरक्षा और सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर रखा गया। संदेशखाली और आरजी कर जैसे मामलों को भी चुनावी मुद्दा बनाया गया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बंगाल में भाजपा की मौजूदा सफलता सिर्फ नारों का नतीजा नहीं, बल्कि Amit Shah की माइक्रो मैनेजमेंट रणनीति, डेटा आधारित प्लानिंग और बूथ स्तर की इंजीनियरिंग का परिणाम है, जिसने एक बार फिर उन्हें भाजपा का सबसे बड़ा चुनावी रणनीतिकार साबित कर दिया

By DTI