हरिद्वार,संजीव मेहता। उत्तराखंड में आज उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला वोटर अपने वोट का इस्तेमाल कर तय कर देंगे कि उत्तराखंड में कांग्रेस भाजपा व आम आदमी पार्टी में से कौन लोगों को अपनी और आकर्षित कर वोट में तब्दील करने में कामयाब रहा ।

अगर बात करें हरिद्वार शहरी विधानसभा क्षेत्र की तो यहां पर आम आदमी पार्टी की तरफ से संजय सैनी चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा कांग्रेस के ही बीच है। यहां से प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष मदन कौशिक का मुकाबला कांग्रेस के सतपाल ब्रह्मचारी से है।

इस बार कुंभ घोटाला हो या फिर लाइब्रेरी घोटाला या नशा इन चुनावों में मुद्दा बनते नजर आए इसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। हरिद्वार में बढती बेरोजगारी और कोरोनाकाल में हुए नुकसान के बाद यहां ब्यापारियों को हुए भारी नुकसान को भी लोग मुद्दा बनाते दिख रहे हैं वोटिंग का दिन आते आते कांग्रेस ने नशे को मदन कौशिक के खिलाफ बड़ा हथियार बना लिया इस मुद्दे पर ब्रह्मचारी कौशिक के खिलाफ भारी पड़ते नजर आ रहे है । मेयर व मेयर पति अशोक शर्मा व दूसरे कांग्रेसियों का ब्रह्मचारी के साथ डट कर खड़े होकर चुनाव प्रचार करना भी कांग्रेस के पक्ष में जा रहा है ।जबकि आम आदमी पार्टी के बारे में सतपाल ब्रह्चारी व कांग्रेस की तरफ से यही प्रचार किया जाता रहा कि वह जीत की स्थिति में नही है वह केवल वोट कटवा पार्टी है और भाजपा की बी टीम है ।

दूसरी तरफ बात करे 4 बार के विजेता मदन कौशिक की तो तीन साल पहले हरिद्वार नगर निगम चुनाव में बीजेपी का मेयर प्रत्याशी बनाने के बाद भी भाजपा प्रत्याशी अन्नू कक्कड़ मेयर का चुनाव हार गई थीं। इसके बाद मदन कौशिक का भी विरोध शुरू हो गया था। चार चुनावों में मदन कौशिक को बीजेपी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने एक तरफा समर्थन कर जीत दिलाई, लेकिन चुनाव 2022 आते-आते हरिद्वार सीट पर आशुतोष शर्मा, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, पूर्व पार्षद कन्हैया खेवड़िया ने कौशिक के खिलाफ ताल ठोक दी थी।
दूसरी तरफ भाजपा प्रत्याशी मदन कौशिक राजनीति के माहिर खिलाड़ी है और आखिर तक बाजी पलटने का माद्दा रखते है उनको यकीन है कि लोग राम मंदिर,मोदी मैजिक व विकास के मुद्दे पर लोग खुल कर उनके पक्ष में मतदान करेंगे । जातीय समीकरण की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा कुल मतदाताओं के 35 फीसदी ब्राह्मण मतदाता हैं। जबकि दूसरे स्थान पर पंजाबी समुदाय के मतदाताओं की आबादी 20 फ़ीसदी है।ठाकुर 15 फ़ीसदी हैं, जबकि वैश्य समुदाय की आबादी 10 फीसदी है। अब तक भाजपा को मिली जीत का विश्लेषण करें तो उसमे उनका ब्राह्मण होना और पार्टी को बनियों का एकतरफा समर्थन होना इसमे एक भूमिका निभाती आ रही है। अगर ऐसा इतिहास फिर दोहराया गया तो कोई शक नही की मदन कौशिक 5 वी बार भी जीत जाएगे।
पहली बार जब बीजेपी से मदन कौशिक को टिकट मिला था तो उस समय कांग्रेस ने अपने कद्दावर नेता पारस कुमार जैन को मैदान में उतारा था, लेकिन उस समय कांग्रेस से बगावत कर विकास चौधरी बसपा के हाथी पर सवार हो गए। जिसके कारण कांग्रेस के समीकरण ऐसे बदले कि फिर बीजेपी ने जिले में लगातार जीत दर्ज की।

दूसरे चुनाव में साल 2007 में हुए चुनाव में भाजपा के प्रत्याशी मदन कौशिक ने अपने प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी के अम्बरीश कुमार को 28,640 वोटों से पराजित करके लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी।इसके बाद लगातार भाजपा कांग्रेस की ही टक्कर होती रही।

अब यह तो आने वाला समय बताएगा कि 10 मार्च को नतीजे घोषित होने के बाद पता चलेगा जीत किसको नसीब होती है ।

By DTI