हरिद्वार: हर्षिता। 2027 का हरिद्वार अर्धकुंभ कई मायनों में इतिहास रचने जा रहा है। पहली बार इस अर्धकुंभ में साधु-संन्यासी, वैरागी और उदासीन अखाड़े कुंभ की तरह ही तीन शाही अमृत स्नानों में हिस्सा लेंगे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सरकार की इस पेशकश को मंजूरी देते हुए तिथियों की घोषणा कर दी है।
👉 शाही अमृत स्नान की तिथियां

पहला स्नान: 6 मार्च 2027 (महाशिवरात्रि)
दूसरा स्नान: 8 मार्च 2027 (सोमवती अमावस्या)
तीसरा व अंतिम स्नान: 14 अप्रैल 2027 (वैशाखी-मेष संक्रांति)
(14 जनवरी को मकर संक्रांति पर भी स्नान होगा, लेकिन वह पर्व स्नान होगा, अमृत स्नान नहीं।)
👉 क्यों है खास?
अब तक हरिद्वार अर्धकुंभ सिर्फ श्रद्धालुओं के स्नान पर्व तक सीमित रहा करता था।
साधु-संन्यासियों के शिविर और नगर प्रवेश जैसी परंपरा नहीं होती थी।
लेकिन इस बार सिंहस्थ त्र्यंबकेश्वर (नासिक) जुलाई-अगस्त में होगा, जबकि हरिद्वार अर्धकुंभ मार्च-अप्रैल में।
इस अंतर की वजह से अखाड़ों को हरिद्वार आने और शाही स्नान की परंपरा निभाने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
👉 अखाड़ा परिषद का बयान
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने कहा –
“अमृत स्नान ही हरिद्वार कुंभ और अब अर्धकुंभ की आत्मा है। इस ऐतिहासिक आयोजन से हरिद्वार एक नई परंपरा का साक्षी बनेगा।”
👉 पारंपरिक बदलाव
प्रयागराज की तरह अब हरिद्वार अर्धकुंभ भी शाही स्नानों की भव्यता से जगमगाएगा। प्रशासनिक दृष्टि से तिथियों की आधिकारिक घोषणा जल्द होगी ताकि सुरक्षा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा सके।
हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 न सिर्फ आस्था का महासंगम होगा, बल्कि पहली बार इतिहास में संन्यासी अखाड़ों के तीन शाही स्नानों के साथ दिव्यता और भव्यता की नई मिसाल बनेगा
