देहरादून | हर्षिता। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की अहम बैठक में उपनल कर्मचारियों को लेकर बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। लंबे समय से चली आ रही मांग पर सरकार ने समान कार्य–समान वेतन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया कि उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के अंतर्गत 10 वर्ष पूरे कर चुके कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से समान कार्य–समान वेतन का लाभ दिया जाएगा। इस फैसले से प्रदेश के करीब 7 हजार उपनल कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा।
▶️ ऐसे मिलेगा लाभ
2015 तक नियुक्त उपनल कर्मियों को शासनादेश जारी होते ही तत्काल लाभ
2016, 2017 और 2018 के कर्मचारियों को तीन चरणों में शामिल किया जाएगा
2032 तक के उपनल कर्मचारियों को भी समान कार्य–समान वेतन का दायरा मिलेगा
कर्मचारियों को विभागीय संविदा में नहीं लिया जाएगा
▶️ उपनल में नई भर्ती को लेकर बड़ा फैसला
अब आगे से उपनल में केवल भूतपूर्व सैनिकों के परिजनों को ही रोजगार दिया जाएगा।
▶️ कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का बयान
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके थे कि उपनल कर्मचारियों के साथ न्याय होगा। आज कैबिनेट के फैसले ने उस भरोसे को जमीन पर उतार दिया है। वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
▶️ कोर्ट के आदेश के बाद सरकार पर था दबाव
गौरतलब है कि 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण का आदेश दिया था। राज्य सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज हो चुकी थी। इसके बाद उपनल कर्मियों ने सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका भी दाखिल की थी।
कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में सरकार ने मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया था, जिसकी सिफारिशों पर आज कैबिनेट ने अंतिम मुहर लगा दी।
🟢 निष्कर्ष
यह फैसला न सिर्फ उपनल कर्मचारियों के संघर्ष की जीत है, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता और न्यायप्रियता को भी दर्शाता है।
