जोधपुर,डी टीआई न्यूज़।

अक्षय तृतीया से शादियों का सीजन शुरू हो गया था। इस बार सावों की धूम भी रही। शुक्रवार 5 मई को बुद्ध पूर्णिमा पर भी शादियां हुईं। शादियों के सीजन में कई निमंत्रण भी मिले।

ऐसे में एक शादी का इन्विटेशन खास था। कार्ड पर लिखा था पीपल रो ब्याव (पीपल की शादी ) । एक परिवार ने पीपल की शादी गांव के ठाकुर जी (शालिग्राम) से करवाई है। इसके पीछे क्या कारण और कहानी थी, आप भी जानिए |

ये शादी जोधपुर से 90 किलोमीटर दूर केतु गांव के सालासर ये शादी जोधपुर से 90 किलोमीटर दूर केतु गांव के सालासर नगर में हुई। शादी को लेकर कई दिन पहले से धूमधाम से तैयारियां की गईं। एक बेटी की तरह पीपल की शादी कराई गई और शनिवार को विदाई भी की जाएगी।

जोधपुर के के गांव में शुक्रवार को महिलाएं मंगल गीत गाती दिखीं। ये शादी गांव के लालाराम कुलरिया परिवार की ओर से करवाई गई। शादी समारोह में शामिल होने हैदराबाद से भी रिश्तेदार यहां पहुंचे।
लालाराम कुलरिया बताते है कि मैं और मेरा परिवार जोधपुर शहर के सरस्वती नगर में रहता है। वहां भी हमारा मकान है। साल 2017 में हमारे जोधपुर स्थित घर के बाहर रखे गमले में पीपल और पीपली दोनों उग गए थे। कुछ समय बाद जब पौधे बड़े हुए तो परिवार परेशान होने लगा। क्योंकि घर में पीपल-पीपली का पेड़ होना अच्छा नहीं माना जाता।

ऐसे में विचार आया कि क्यों न इन दोनों पेड़ को गांव ले जाया जाए। इस पर परिवार के लोग इन पेड़ को गांव ले आए और यहां विधि-विधान से इन्हें दोबारा रोपा गया। गांव में परिवार भी इनका ख्याल रखता था। पूजा के दौरान रोज इन्हें सींचा जाता था।
मैं और मेरा परिवार जोधपुर शहर के सरस्वती नगर में रहता है। वहां भी हमारा मकान है। साल 2017 में हमारे जोधपुर स्थित घर के बाहर रखे गमले में पीपल और पीपली दोनों उग गए थे। कुछ समय बाद जब पौधे बड़े हुए तो परिवार परेशान होने लगा। क्योंकि घर में पीपल-पीपली का पेड़ होना अच्छा नहीं माना जाता।

ऐसे में विचार आया कि क्यों न इन दोनों पेड़ को गांव ले जाया जाए। इस पर परिवार के लोग इन पेड़ को गांव ले आए और यहां विधि-विधान से इन्हें दोबारा रोपा गया। गांव में परिवार भी इनका ख्याल रखता था। पूजा के दौरान रोज इन्हें सींचा जाता था।
इसी दौरान परिवार के लोगों से बातचीत की और निर्णय लिया कि बेटी की तरह हम पीपली की शादी करवाएंगे और उसकी विदाई भी होगी। ऐसे में गांव के लोगों और परिवार के साथ यह निर्णय लिया कि इनकी शादी गांव से तीन किलोमीटर दूर बने मंदिर में विराजित ठाकुर जी से होगी।

गांव के पंडित गौतम दास ने ही इनकी कुंडली मिलान की और बुद्ध पूर्णिमा के दिन शादी का मुहूर्त निकाला गया। इसके बाद पूरा गांव और परिवार के सदस्य इस आयोजन में जुटे ।
लगभग 400 साल पुराने इस मंदिर की मान्यता दूर-दूर तक है। इसमें गांव के ही वैष्णव, ब्राह्मण परिवार के लोग शामिल । यहां से ढोल नगाड़ों की धन के साथ बारात केत सालासर नगर पहुंची।

इसके बाद बारात को रुकवाया गया। घर में पड़ले की रस्म निभाई गई। घर के बाहर ढोल-नगाड़े बजाए गए। शाम को 7.30 बजे गोधूलि वेला में पीपली की शादी विधि विधान से कराई गई। इसमें लालाराम और उनकी पत्नी देवी ने कन्यादान किया। शनिवार 6 मई को 500 लोगों की प्रसादी का आयोजन किया जाएगा।
विवाह समारोह के लिए परिवार की बहन बेटियों को ससुराल जाकर उन्हें न्योता दिया था। इस विवाह के लिए लालाराम की 3 बेटियां और परिवार की अन्य बेटियां भी ससुराल से पीहर
पहुंची थी। गांव की अन्य बहन बेटियों को भी शादी में आने के लिए निमंत्रण दिया गया था।
यहां पर महिलाओं ने रोजाना मंगल गीत गाए और ठाकुरजी को विवाह में आने के लिए निमंत्रण दिया था। पीपल के पेड़ की हल्दी पीटी की गई। मेहंदी लगाई गई।
शादी को लेकर घर के पास चंवरी तैयार की गई। जहां पर ठाकुर जी के फेरे करवाए गए। शादी के लिए घर में भी रंग रोगन पर आकर्षक सजावट की गई। शादी में आने वाले मेहमानों के लिए टेंट लगाया गया था।
कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए राजस्थान से बाहर रहने वाले परिवार के लोग भी पहुंचे थे। अर्जुन सुथार ने बताया कि वह इस शादी को लेकर काफी उत्सुक थे और हमारी संस्कृति और विरासत से जुड़ी शादी में हिस्सा लेने के लिए हैदराबाद से पहुंचे। उनके साथ अन्य शहरों में काम कर रहे परिवार के 10 से अधिक सदस्य भी पहुंचे।
लालाराम ने बताया कि ठाकुर जी की बारात की विदाई शनिवार को होगी। दहेज में अलमारी, पलंग सहित बर्तन और अन्य गृहस्थी का सामान दिया है। इसके साथ ही एक चांदी की गाय के बाद सोने चांदी के जेवरात भी दिए।
ठाकुरजी की बारात लेकर आने वाले वैष्णव परिवार को दहेज का सामान, गहने आदि दिए गए।

बारात वाले दिन शुक्रवार को केवल बारातियों का खाना हुआ। लेकिन, अगले दिन सभा के लिए पूरे गांव को इन्विटेशन दिया गया। शनिवार को करीब 500 लोग शामिल होंगे। इन सभी के लिए प्रसादी की व्यवस्था होगी।
केतु गांव में होने वाली इस अनूठी शादी की आस पास की जगह पर भी चर्चा रही। लोगों ने सोशल मीडिया पर डिजिटल इन्विटेशन कार्ड को शेयर किया। परिवार के लोगों ने इस अनूठी शादी के लिए प्रीतिभोज का मैन्यू भी तैयार किया। शादी में शामिल होने वाले मेहमान भी इस अनूठे आयोजन को लेकर उत्साह में थे ।
कुलरिया परिवार के सदस्यों ने बताया कि हमारे धर्म में पेड़ पौधों को भी विशेष महत्व दिया गया है और वर्तमान समय को देखते हुए पर्यावरण का संरक्षण होना बेहद जरूरी है।

इस तरह के कार्यक्रमों का मकसद हमारी अनुपम संस्कृति के बारे में लोगों को बताना और पेड़ पौधों को भी परिवार के भांति पालने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश है। इस तरह का आयोजन यह बताता है कि खास तौर पर राजस्थान और कुलरिया परिवार के सदस्यों ने बताया कि हमारे धर्म में पेड़ पौधों को भी विशेष महत्व दिया गया है और वर्तमान समय को देखते हुए पर्यावरण का संरक्षण होना बेहद जरूरी है।

By DTI