नई दिल्ली: दिव्या टाइम्स इंडिया।लोग पुराने जूतों को बेकार समझकर कूड़े में फेंक देते हैं, लेकिन मुंबई के दो दोस्तों Shriyans Bhandari और Ramesh Dhami ने इन्हीं फेंके हुए जूतों से करोड़ों का कारोबार खड़ा कर दिया। दोनों ने साल 2015 में Greensole की शुरुआत की और आज यह स्टार्टअप हर साल करीब 3 करोड़ रुपये की कमाई कर रहा है।
इस आइडिया की शुरुआत तब हुई जब श्रीयांश ने अपने दोस्त और मैराथन कोच रमेश को पुराने जूते ठीक करते देखा. रमेश जूते फेंकना नहीं चाहते थे क्योंकि उनका सोल अभी भी मजबूत था. यही छोटी सी बात बड़े बिजनेस आइडिया में बदल गई. रिसर्च में पता चला कि दुनियाभर में अरबों जूते कचरे में फेंके जाते हैं जिन्हें खत्म होने में 200 साल से ज्यादा लगते हैं.
शुरुआत आसान नहीं थी. दोनों का फुटवियर इंडस्ट्री से कोई संबंध नहीं था. मुंबई की झुग्गी बस्ती में किराए की छोटी यूनिट से काम शुरू हुआ, जहां एक दिन में सिर्फ 15-20 जोड़ी चप्पलें बन पाती थीं. बाद में Ram Fashion Exports के साथ साझेदारी ने उनके बिजनेस को नई रफ्तार दी.
आज यह स्टार्टअप हर महीने 15 से 20 हजार पुराने जूते इकट्ठा करता है. इन्हें रिसाइकिल कर जरूरतमंद बच्चों के लिए चप्पलें बनाई जाती हैं. टीम गांवों और आदिवासी इलाकों में जाकर बच्चों के पैरों का नाप भी लेती है ताकि सही फिटिंग मिल सके.
100 से ज्यादा कॉर्पोरेट कंपनियों के CSR सपोर्ट से यह मॉडल अब देश के 20 राज्यों तक पहुंच चुका है. वहीं कंपनी इको-फ्रेंडली स्नीकर्स और एक्सेसरीज बेचकर करोड़ों का टर्नओवर कर रही है.
अब इन दोनों का सपना भारत से बाहर नेपाल, भूटान और अफ्रीका तक इस मॉडल को ले जाने का है. साथ ही जूते के कचरे से रनिंग ट्रैक बनाने की भी तैयारी है.
एक लाइन:
“जिसे लोग कूड़ा समझकर फेंक देते थे, उसी ने इन दो दोस्तों को करोड़पति बना दिया!”

By DTI